Haryana CM Nayab Singh Saini 18 अक्टूबर को भगवान वाल्मीकि प्रकट दिवस के अवसर पर जालंधर में आयोजित विशाल तीर्थयात्रा में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री श्रद्धालुओं के काफिले को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यात्रा में करीब 50 हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 18 अक्टूबर 2026 को पंजाब के जालंधर पहुंचेंगे। यहां वे भगवान वाल्मीकि प्रकट दिवस के अवसर पर आयोजित विशाल तीर्थयात्रा में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस यात्रा का आयोजन जालंधर से अमृतसर स्थित श्री रामतीर्थ तक किया जाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी श्रद्धालुओं की बसों के काफिले को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों करेंगे।
दोपहर एक बजे भगवान वाल्मीकि आश्रम पहुंचेंगे CM सैनी
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 18 अक्टूबर को दोपहर एक बजे जालंधर के शांति नगर स्थित भगवान वाल्मीकि आश्रम पहुंचेंगे। यहां वे माथा टेककर आशीर्वाद लेंगे।
इसके बाद मुख्यमंत्री पैदल मार्च में शामिल होंगे। वे उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित भी करेंगे। इसके बाद तीर्थयात्रा के लिए श्रद्धालुओं की बसों के काफिले को रवाना किया जाएगा।
50 हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना
इस विशाल तीर्थयात्रा में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। श्रद्धालु जालंधर से अमृतसर स्थित श्री रामतीर्थ तक यात्रा करेंगे।
श्री रामतीर्थ पहुंचकर श्रद्धालु भगवान वाल्मीकि के पवित्र स्थल पर नमन करेंगे। यह आयोजन भगवान वाल्मीकि के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर होगा।
इसके साथ ही, यात्रा के माध्यम से भगवान वाल्मीकि की शिक्षाओं और उनके विचारों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
समानता और सामाजिक समरसता का संदेश
भगवान वाल्मीकि प्रकट दिवस के अवसर पर आयोजित इस यात्रा का उद्देश्य सामाजिक समरसता और भाईचारे को मजबूत करना है। आयोजन के माध्यम से समानता और आपसी सहयोग का संदेश दिया जाएगा।
भगवान वाल्मीकि की शिक्षाएं समाज को सद्भाव और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देती हैं। इस आयोजन में श्रद्धालुओं की भागीदारी से इन विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
पंजाब और हरियाणा के बीच मजबूत होगा सांस्कृतिक जुड़ाव
यह तीर्थयात्रा पंजाब और हरियाणा के बीच सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी बनेगी। दोनों राज्यों के लोगों की भागीदारी से आपसी जुड़ाव को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता पर भी जोर रहेगा। श्रद्धालु भगवान वाल्मीकि की शिक्षाओं के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे।