कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। दोनों नेताओं ने हिरासत को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका पर तत्काल सुनवाई करने पर सहमति जताई है। मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और शांति बनाए रखने से जुड़े कानूनी प्रावधानों से संबंधित है।
सौरव दास और आशुतोष रांका पहुंचे हाई कोर्ट
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। दोनों नेताओं ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के हिरासत बढ़ाने के फैसले को चुनौती दी है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को उनकी याचिका पर सुनवाई करने की सहमति जताई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ करेगी।
दोनों नेताओं के वकीलों ने मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की थी। दशहरा के कारण हाई कोर्ट में अवकाश चल रहा है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं ने मामले पर जल्द सुनवाई की जरूरत बताई।
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 19 अक्टूबर को दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाने का आदेश दिया था। अब इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
CJP Leaders Plea: मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी याचिका में हिरासत जारी रखने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से उनके स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
दोनों नेताओं के अनुसार, उन्होंने जमानत के लिए आवश्यक जमानतदार पेश किए थे। इसके बावजूद उनकी रिहाई नहीं हुई।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने पुलिस की अर्जी के आधार पर हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मामले में स्वतंत्र रूप से पर्याप्त जांच नहीं की गई।
उन्होंने जमानतदारों को स्वीकार नहीं किए जाने के फैसले पर भी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि जमानतदारों से संबंधित प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
हालांकि, ये सभी याचिकाकर्ताओं के आरोप हैं। इन पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
Jantar Mantar Protest: तिरंगा लेकर पहुंचे थे दोनों नेता
यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे।
दिल्ली पुलिस ने इस घटनाक्रम के बाद दोनों के खिलाफ कार्रवाई की। इसके बाद उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
15 अक्टूबर को दोनों नेताओं को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई।
पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका का हवाला दिया था। मजिस्ट्रेट के आदेश में भी सार्वजनिक शांति और व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख किया गया था।
दोनों नेताओं ने अब इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट से राहत मांगी है।
Judicial Custody: जमानतदारों को लेकर भी उठाए सवाल
याचिका में जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया को भी चुनौती दी गई है। सौरव दास और आशुतोष रांका का कहना है कि जमानतदार पेश करने के बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया।
उनके वकीलों ने तर्क दिया कि जमानतदारों के दस्तावेजों की जांच लंबित होने पर भी कानून के अनुसार राहत दी जा सकती है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि जमानतदारों की पात्रता जांचने की प्रक्रिया उचित तरीके से होनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को मनमाना बताया है।
दूसरी ओर, मजिस्ट्रेट ने पुलिस की आपत्तियों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हिरासत बढ़ाई थी।
अब हाई कोर्ट के सामने दोनों पक्षों के तर्क महत्वपूर्ण होंगे। अदालत की सुनवाई के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
Delhi High Court Hearing: आज की सुनवाई पर नजर
दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की सहमति दी है। बुधवार, 21 अक्टूबर को मामले की सुनवाई निर्धारित है।
दोनों नेताओं की बढ़ी हुई न्यायिक हिरासत की अवधि भी 21 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। ऐसे में सुनवाई उनके लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
याचिका में हिरासत के आदेश को रद्द करने और मौलिक अधिकारों की रक्षा की मांग की गई है। अब अदालत यह देखेगी कि हिरासत बढ़ाने की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं।
फिलहाल दोनों नेताओं की रिहाई को लेकर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। आगे की स्थिति हाई कोर्ट और संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।