हरियाणा के अंबाला कैंट में 1857 की क्रांति को समर्पित शहीद स्मारक बनकर तैयार हो गया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। उद्घाटन के बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर लगभग 800 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। स्मारक में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े इतिहास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।
Martyr Memorial: 23 गैलरी में दिखेगा 1857 की क्रांति का इतिहास
अनिल विज के अनुसार, स्मारक में कुल 23 गैलरी बनाई गई हैं। इनमें अंबाला, हरियाणा, मेरठ, दिल्ली और पंजाब सहित विभिन्न क्षेत्रों का इतिहास दिखाया गया है। गुजरात और झांसी में हुए संघर्षों को भी इसमें स्थान मिला है।
इन गैलरी के माध्यम से लोग 1857 की क्रांति की घटनाओं को समझ सकेंगे। स्मारक का उद्देश्य उन स्वतंत्रता सेनानियों को पहचान दिलाना है, जिनके योगदान को पर्याप्त स्थान नहीं मिला।
विज ने कहा कि यह स्मारक केवल अंबाला या हरियाणा तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को समर्पित राष्ट्रीय स्मारक है।
700 से अधिक वीरों के नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित
स्मारक में शोध के आधार पर 700 से अधिक वीरों की पहचान की गई है। इनके नाम, पिता के नाम और गांवों से संबंधित जानकारी जुटाई गई है। इन वीरों के नाम स्मारक में स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए गए हैं।
अनिल विज के मुताबिक, ऐतिहासिक तथ्यों की जांच के लिए पांच प्रतिष्ठित इतिहासकारों की समिति बनाई गई थी। इसके अलावा विभिन्न संस्थानों और ऐतिहासिक अभिलेखागार से दस्तावेज मंगवाए गए।
इनमें लंदन की लाइब्रेरी और लाहौर से प्राप्त दस्तावेज भी शामिल हैं। उपलब्ध सामग्री के आधार पर स्मारक में ऐतिहासिक घटनाओं को प्रस्तुत किया गया है। भविष्य में अन्य वीरों की प्रमाणिक जानकारी मिलने पर उनके नाम भी जोड़े जा सकेंगे।
360 डिग्री प्रोजेक्शन और लेजर शो होंगे आकर्षण
स्मारक में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यहां 360 डिग्री प्रोजेक्शन के जरिए क्रांति से जुड़ी घटनाओं को दिखाने की व्यवस्था है। इसके अलावा साउंड और लेजर शो भी आयोजित किए जाएंगे।
परिसर में 2,500 लोगों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर बनाया गया है। यहां 300 लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम भी मौजूद है। अनिल विज के अनुसार, स्मारक को विस्तार से देखने में करीब छह घंटे लग सकते हैं।
श्रद्धांजलि देने के लिए एक विशेष डिजिटल गैलरी भी तैयार की गई है। यहां आगंतुक हाथ रखकर डिजिटल माध्यम से श्रद्धांजलि दे सकेंगे। इसका रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।
63 मीटर ऊंची संरचना और स्काई कैफे
स्मारक परिसर में कमल के फूल के आकार की 63 मीटर ऊंची संरचना बनाई गई है। इसमें दो हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई गई हैं। इसके शीर्ष पर स्काई कैफे भी विकसित किया जा रहा है।
परिसर में एक हेलीपैड और बिजली आपूर्ति के वैकल्पिक इंतजाम भी किए गए हैं। आगंतुकों की सुविधा के लिए टिकट बुकिंग की मोबाइल ऐप और वेबसाइट तैयार की गई है। इसके माध्यम से ऑनलाइन टिकट बुक किए जा सकेंगे।
स्मारक परिसर में आठ दुकानें भी बनाई गई हैं। यहां स्मृति-चिह्न और स्मारक की प्रतिकृतियां उपलब्ध कराने की योजना है।
1857 की क्रांति में अंबाला की भूमिका पर जोर
अनिल विज ने कहा कि 1857 के संघर्ष में शामिल कई वीरों को इतिहास में उचित पहचान नहीं मिली। इस स्मारक के जरिए उनके योगदान को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने अंबाला में क्रांति की शुरुआती घटनाओं से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों का भी उल्लेख किया। विज के अनुसार, कुछ अभिलेखों में अंबाला में 10 मई 1857 को मेरठ के विद्रोह से पहले संघर्ष शुरू होने का जिक्र मिलता है।
उन्होंने सभी राज्यों से अपने वार्षिक राज्य दिवस के कार्यक्रम स्मारक में आयोजित करने का आग्रह किया है। इससे विभिन्न राज्यों के लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।
फिलहाल, स्मारक का निर्माण पूरा हो चुका है। आम जनता के प्रवेश के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन का इंतजार है।